पोप द्वारा हस्तक्षेप रोकने के आग्रह को दरकिनार करते हुए, लेफ़ेब्रेवादी गुट ने चार नए बिशपों की नियुक्ति की है। वेटिकन ने इस कदम को विधिविरोधी और विधर्मी बताते हुए "विभाजनकारी कृत्य" करार दिया है। कार्डिनल पारोलिन ने इस घटना पर "गहरी पीड़ा" व्यक्त की है। वेटिकन ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले के परिणाम होंगे, लेकिन भविष्य में संवाद के द्वार पूरी तरह से बंद नहीं किए जाएंगे। यह घटना कैथोलिक चर्च के भीतर पारंपरिकतावादी गुटों और वेटिकन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को और बढ़ाती है। इस विभाजनकारी कदम से चर्च में एकता और सुलह की संभावनाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। वेटिकन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहा है।