लेबनान में लंबे समय से प्रतीक्षित युद्धविराम के बाद भी, हज़ारों विस्थापित लोगों को राहत नहीं मिली है। हुसैन मरही जैसे लोग अपने घरों को लौटने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके घर इजरायली हमलों में नष्ट हो गए हैं या उनके शहर इजरायली सेना द्वारा कब्ज़े में हैं। दक्षिणी लेबनान के कई शहर इजरायली सैन्य नियंत्रण में हैं, जिसके कारण निवासी विस्थापित होने को मजबूर हैं। युद्धविराम ने सापेक्ष शांति तो लाई है, लेकिन विस्थापितों के लिए अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। ये लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है। स्थिति दर्शाती है कि शांति समझौता विस्थापित आबादी के लिए स्थायी समाधान नहीं है। पुनर्निर्माण और सुरक्षित वापसी की व्यवस्था अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।