प्रोफेसर शक्मा बरसलर, जो सरकार विरोधी प्रदर्शनों की प्रमुख नेताओं में से एक हैं, ने संसद में चल रहे न्यायिक विवाद पर पहली बार अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बरसलर ने सरकार और विपक्ष दोनों से संवाद स्थापित करने और एक समझौते पर पहुंचने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि देश के हित में सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए। इस प्रतिक्रिया के बाद, राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि बरसलर का बयान प्रदर्शनों की आगे की दिशा को कैसे प्रभावित करेगा। यह विवाद इजराइल की न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों से संबंधित है, और इसने देश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया है। बरसलर की प्रतिक्रिया को इस विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।