जर्मनी के शीर्ष अर्थशास्त्री और कील इंस्टीट्यूट फॉर द वर्ल्ड इकोनॉमी के अध्यक्ष, मॉरित्ज़ शुलरिक ने मूल्य वर्धित कर (वैट) में महत्वपूर्ण वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। उनका सुझाव है कि इस वृद्धि से प्राप्त अतिरिक्त राजस्व का उपयोग अन्यत्र करों में कटौती और सामाजिक योगदानों को कम करने के लिए किया जाए। शुलरिक का मानना है कि इससे कर प्रणाली को अधिक प्रभावी और न्यायसंगत बनाया जा सकता है। यह प्रस्ताव जर्मनी की वर्तमान आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के उद्देश्य से है। इस कदम का लक्ष्य व्यवसायों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ पहुंचाना है, जिससे आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर व्यापक बहस होने की संभावना है क्योंकि इसका नागरिकों की क्रय शक्ति पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। यह देखना बाकी है कि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगी या नहीं।

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