हाल के वर्षों में, भू-राजनीतिक संवाद में तेज़ी से बदलाव आया है। पारंपरिक प्रेस ब्रीफिंग की तुलना में, अब राजनेता और सरकारी अधिकारी सीधे सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों से जनता से संवाद कर रहे हैं। यह बदलाव सूचना के प्रसार की गति को बढ़ाता है, लेकिन गलत सूचना और दुष्प्रचार की संभावना को भी बढ़ाता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवर-उल-हक काकड़ ने भी इस प्रवृत्ति को अपनाया है, और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सक्रिय रूप से अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। यह लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे यह त्वरित संवाद, कूटनीति और सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव संचार को अधिक लोकतांत्रिक बना सकता है, लेकिन इसके लिए पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है। इस नए युग में, सरकारों को सूचना प्रबंधन और जनता के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ने के लिए नई रणनीतियों को अपनाने की आवश्यकता है।
