घाना की वकील ग्लोरिया ओफोरी-बोआडू ने शिक्षकों द्वारा छात्रों के यौन शोषण के मामलों में घाना शिक्षा सेवा (GES) के अनुशासनात्मक ढांचे की आलोचना की है। उनका कहना है कि निलंबन (interdiction) जैसी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और इससे अपराधियों को उचित सजा नहीं मिलती। ओफोरी-बोआडू ने GES के आचार संहिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें यौन शोषण को पेशेवर कदाचार माना गया है, लेकिन सजा का प्रावधान कमजोर है। उन्होंने ऐसे मामलों में कड़ी और निवारक सजा की मांग की है ताकि शिक्षकों द्वारा छात्रों का यौन शोषण रोकने में मदद मिल सके। उनका मानना है कि वर्तमान व्यवस्था छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल हो रही है। इस मामले पर न्यूज़फ़ाइल कार्यक्रम में बोलते हुए, उन्होंने GES से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।