लेखक को सोने से पहले भूख लगी, तो उन्होंने रसोई में रखे अपने उगाए हुए टमाटरों में से दो टमाटर लिए। उन्होंने फ्रिज से एक एवोकाडो भी निकाला और उसे छोटे टुकड़ों में काटा। फिर उन्होंने दो ब्रेड स्लाइस पर मक्खन लगाकर, कटे हुए एवोकाडो और टमाटर के साथ सलाद के रूप में खाया। यह उनका साधारण रात्रिभोज था। लेखक ने चाय नहीं पी, क्योंकि उन्हें सोने से पहले चाय पीने की आदत नहीं है। यह घटना एक शांत और साधारण रात के खाने का वर्णन करती है। यह एक लंबी श्रृंखला का भाग है, जिसका शीर्षक "शरद ऋतु की सुगंध" है।
