भाषाविद् अनीता गोल्डमैन का तर्क है कि जब भाषाएं लुप्त हो जाती हैं, तो हम अनुभव और ज्ञान भी खो देते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भाषा मॉडल इस नुकसान की प्रक्रिया को तेज कर रही हैं। गोल्डमैन के अनुसार, भाषाई विविधता हमारी संस्कृति और इतिहास की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कवच है। भाषा के माध्यम से ही हम पीढ़ियों से प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को संरक्षित रखते हैं। यदि हम शब्दों को परिभाषित करने की क्षमता खो देते हैं, तो हम उस ज्ञान को भी खो देते हैं जो उनके साथ जुड़ा हुआ है। इसलिए, भाषाओं को बचाने का प्रयास जैव विविधता को बचाने के समान ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों ही मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं। भाषाई विविधता को संरक्षित करने से हम अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक समझ को सुरक्षित रख सकते हैं।