लागोस राज्य स्वास्थ्य मंत्रालय ने रैंडल जनरल अस्पताल में उपचार में देरी और जबरन वसूली के आरोपों को खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि मरीज़ की उम्र गलत बताई गई है और उन्हें वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई थी। आरोपों में मरीज़ के इलाज में अनावश्यक देरी और पॉइंट ऑफ़ सेल (पीओएस) मशीन के ज़रिए जबरन वसूली का दावा किया गया था। मंत्रालय ने इन दावों को निराधार बताया है और अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मंत्रालय ने मरीज़ के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड की भी जाँच की है और आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई है। यह घटना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को उजागर करती है। मंत्रालय ने ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए भविष्य में और कदम उठाने की बात कही है।