स्कूलों में छात्रों को ‘आलसी’ का लेबल लगाने की प्रवृत्ति पर एक सवाल उठाया गया है। अक्सर, छात्रों के कार्यों का मूल्यांकन बाहरी दिखावे के आधार पर किया जाता है, जैसे कि समय पर असाइनमेंट जमा न करना या कक्षा में प्रश्न न पूछना। यह लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि क्या हम छात्रों को जल्दी से आलसी मान लेते हैं, बिना उनकी परिस्थितियों या संघर्षों को समझे। यह विचार किया जाना चाहिए कि बाहरी व्यवहार आंतरिक कारणों का संकेत हो सकता है, जैसे सीखने में कठिनाई या व्यक्तिगत चुनौतियाँ। शिक्षकों और अभिभावकों को छात्रों के व्यवहार के पीछे की वजहों को समझने के लिए अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। केवल लेबल लगाने से छात्रों का आत्मविश्वास कम हो सकता है और उनकी सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इस मुद्दे पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।