केपीएमजी के अध्यक्ष का प्रस्थान कई समस्याओं में से एक मात्र उदाहरण है। प्रतिद्वंद्वी फर्म पीडब्ल्यूसी ने पहले भी इसी तरह की रणनीति अपनाई थी, जिसमें अस्पष्टता, फिर माफी और अंततः आपदाएं शामिल थीं। केपीएमजी ने, हालांकि, इन गलतियों से कोई सबक नहीं लिया है। यह घटना कंपनी के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नेतृत्व परिवर्तन संगठन में गहरे बैठे मुद्दों का अस्थायी समाधान है। कंपनी को अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं और संस्कृति में व्यापक सुधार करने की आवश्यकता है। इस स्थिति से केपीएमजी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और भविष्य में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।