सोन म्योंग ए की पहली फिल्म टोक्यो में रहने वाली एक किशोर लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी कोरियाई विरासत से जूझ रही है। यह कहानी घर और स्कूल, दोनों जगहों पर उसके अनुभवों को दर्शाती है। फिल्म एक युवा लड़की की आत्म-खोज और पहचान की तलाश पर केंद्रित है। यह एक सरल लेकिन मधुर कहानी है जो सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत विकास के विषयों को छूती है। यह फिल्म दर्शकों को एक किशोर के नजरिए से जापान में कोरियाई समुदाय के जीवन को देखने का अवसर प्रदान करती है। फिल्म में उस लड़की के संघर्षों और उसकी यात्रा को संवेदनशीलता से दिखाया गया है। यह एक प्यारी और मार्मिक फिल्म है जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।