फुटबॉल विश्व कप में कमेंट्री कर रहे टीवी विशेषज्ञों, विशेष रूप से जर्गन क्लॉप और थॉमस मुलर की टिप्पणियों पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि उनकी राय खेल की वास्तविकताओं से दूर है और वे विश्लेषक के रूप में अपनी भूमिका से भटक गए हैं। इस वजह से, जर्गन क्लॉप की जर्मनी की राष्ट्रीय टीम के कोच बनने की संभावना कम हो गई है। विशेषज्ञों का प्रदर्शन इतना निराशाजनक रहा कि यह टूर्नामेंट और विशेषज्ञता के बीच एक दूरी पैदा कर रहा है। कुछ लोगों का तर्क है कि उनकी टिप्पणियां खेल के प्रति निष्पक्ष विश्लेषण प्रदान करने के बजाय व्यक्तिगत विचारों पर आधारित हैं। इस आलोचना से क्लॉप की कोचिंग की संभावना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कुल मिलाकर, विशेषज्ञों के प्रदर्शन ने फुटबॉल विश्व कप की कवरेज में एक बहस छेड़ दी है।