हाल ही में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के बीच हुई शिखर वार्ता को व्यापक रूप से सफल माना जा रहा है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, दोनों पक्षों को अपनी-अपनी ज़रूरतें पूरी करने में सफलता मिली है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन की बढ़ती वैश्विक भूमिका और युद्ध से बचने की उसकी नीति के चलते, शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई अपनी मुलाकातों में महत्वपूर्ण लाभ उठाया। किम जोंग-उन के साथ चीन के लिए भी दांव काफ़ी ऊँचा था, खासकर जापान की संभावित प्रतिक्रियाओं को देखते हुए। इस बैठक से चीन को उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। यह शिखर वार्ता किम जोंग-उन की कूटनीतिक कुशलता को भी दर्शाती है, जिसने चीन के लिए एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। माना जा रहा है कि इस समझौते से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम हो सकता है।