नाटो शिखर सम्मेलन से पहले जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और पोलैंड ने बर्लिन में एकजुट होकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। इन देशों ने नाटो में यूरोप की भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने यूक्रेन को जारी समर्थन देने और रूस पर दबाव बनाए रखने की बात कही है। इन देशों का मानना है कि रूस वर्तमान में मुख्य खतरा है और इस खतरे से निपटने के लिए एकजुट रहना आवश्यक है। यूरोपीय देशों ने नाटो के भीतर अधिक समन्वय और सहयोग की वकालत की है। यह कदम नाटो शिखर सम्मेलन में एक मजबूत यूरोपीय आवाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इन देशों के इस रुख से रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में नाटो की रणनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
