एक मित्र, जो न्यामीयागा की रहने वाली है, कोरियाई फ़िल्में देख रही थी और उसने बताया कि वे बहुत ही शानदार और मनोरंजक हैं। मैंने उसे ‘द टर्मिनेटर’ देखने के लिए प्रेरित किया, लेकिन उसने मना कर दिया। उसका कहना था कि यह फिल्म कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटों पर आधारित है, जिससे उसका मनोरंजन करने का अनुभव खराब हो जाएगा। हम दोनों इस बात पर हँसे। यह बातचीत इस सवाल को जन्म देती है कि जब मशीनें सोचने लगेंगी तो क्या होगा। यह घटना प्रौद्योगिकी और मनोरंजन के बीच के संबंधों पर प्रकाश डालती है। यह दिखाती है कि कैसे लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता के चित्रण से प्रभावित हो सकते हैं।