कज़ाख स्‍टेप में आधुनिक अदालतों से पहले, विवादों का समाधान 'बीय' नामक सम्‍मानित जजों द्वारा किया जाता था। ये जज किसी आधिकारिक नियुक्ति से नहीं, बल्कि जनता के विश्‍वास, परम्‍परागत कानून के गहन ज्ञान और निष्‍पक्षता की ख्याति से प्राप्‍त अधिकार रखते थे। इतिहास के विद्वान झारिल्‍कासिन झप्‍पासोव के अनुसार, ये बीय समुदाय में विवादों को सुलझाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते थे। उनकी निर्णय लेने की प्रक्रिया कानून के सिद्धांतों और सामाजिक मानदंडों पर आधारित होती थी। यह परंपरा कज़ाखस्‍तान की समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत का हिस्‍सा है। यह विधि व्‍यवस्‍था, अच्‍छे आचरण और निष्‍पक्षता के मूल्‍यों को बढ़ावा देती है। यह कहानी कज़ाखस्‍तान के बीयों के महत्‍व और उनकी विधि को उजागर करती है।