काठमांडू में सिद्धार्थ क्षेत्री और जिब्रियल आलम नामक दो नर्तकियों ने शहर के सार्वजनिक स्थानों को अपनी नृत्य कला के मंच के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया है। ये कलाकार सहज प्रस्तुतियों के माध्यम से शहर के व्यस्त परिवहन केंद्रों में जीवन भर रहे हैं। उनकी फ्रीस्टाइल नृत्य शैली ने सोशल मीडिया पर खूब लोकप्रियता हासिल की है, जिससे वे रातोंरात प्रसिद्ध हो गए हैं। इस पहल का उद्देश्य शहर के लोगों को कला से जोड़ना और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर एक नया दृष्टिकोण प्रदान करना है। क्षेत्री और आलम का मानना है कि कला किसी भी स्थान को जीवंत बना सकती है और लोगों को खुशी दे सकती है। उनकी यह पहल काठमांडू की संस्कृति में एक नया रंग भर रही है और अन्य कलाकारों को भी प्रेरित कर रही है। यह जोड़ी शहर के सार्वजनिक स्थानों को पुनः प्राप्त करने और कला को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
