कर्णाली प्रदेश में जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए अरबों रुपये खर्च किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए हैं। सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘जैविक कर्णाली’ अभियान में कार्यान्वयन में कई कमियां पाई गई हैं। नर्सरी स्थापित करने के प्रयास विफल रहे हैं और कई परीक्षण प्रयोगशालाएं अभी भी अधूरी हैं। यह अभियान बुनियादी ढांचे और उचित योजना के अभाव से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को पर्याप्त प्रशिक्षण और समर्थन नहीं मिल पाया है, जिससे जैविक खेती को अपनाने में बाधा आई है। इस स्थिति के कारण, निवेश के बावजूद, जैविक कृषि का विकास धीमा रहा है और किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार अब अभियान की समीक्षा करने और कमियों को दूर करने पर विचार कर रही है।
