द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ द्वारा पोलैंड और बाल्टिक देशों के बीच स्थित 15,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र, कलिनिनग्राद को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। यह क्षेत्र अत्यधिक सैन्यीकृत है और यूरोप के लिए खतरा बन सकता है। सोवियत संघ ने इस क्षेत्र को युद्ध के बाद हासिल किया था। यह पोलैंड और बाल्टिक देशों के बीच एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है। इस क्षेत्र में मिसाइलें तैनात करने की क्षमता यूरोप के लिए सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में रूस अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा है।