इंडोनेशिया के महान विद्वान बुया हमका के अनुसार, इस्लाम में न्याय को अक्सर नैतिकता का शिखर माना जाता है, लेकिन 'इहसान' नामक एक उच्च स्तर भी है। बुया हमका ने अपनी 'तफ़सीर अल-अज़हर' में इस विचार को व्यक्त किया है। 'इहसान' का अर्थ है उत्तम ढंग से कार्य करना और दूसरों के प्रति दयालुता दिखाना, जो केवल न्याय से आगे बढ़कर मानवीय संबंधों को बेहतर बनाता है। यह अवधारणा अल्लाह की दृष्टि में न्याय से भी अधिक महत्वपूर्ण है। बुया हमका का मानना है कि 'इहसान' में न केवल अधिकारों का पालन करना शामिल है, बल्कि दूसरों के प्रति सहानुभूति और करुणा का प्रदर्शन भी शामिल है। यह नैतिक स्तर अल्लाह के करीब जाने और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करने में सहायक है। उनका विश्लेषण इस्लामी नैतिकता की गहरी समझ प्रदान करता है।
