जुलाई महीने में बारिश की कमी दर्ज की गई है, जिससे इस मौसम की सबसे बड़ी वर्षाघाटा का स्तर पहुँच गया है। मई महीने से ही वर्षा में गिरावट देखी जा रही थी, लेकिन जुलाई में यह कमी अपने चरम पर थी। पांच प्रांतों में तो यह घाटा ७५ प्रतिशत तक पहुँच गया है, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है। इस वर्षा की कमी से कृषि और जल संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। अधिकारियों ने स्थिति की निगरानी शुरू कर दी है और संभावित उपायों पर विचार किया जा रहा है। यह कमी आगामी महीनों में भी बनी रहने की आशंका है, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सरकार ने किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए योजनाएं बनाने की बात कही है।