जॉर्डन में नौ साल के अंतराल के बाद पहली बार मौत की सज़ा को अमल में लाया गया। एक ही दिन में छह लोगों को फांसी दी गई, जिससे मानवाधिकार संगठनों में चिंता पैदा हो गई है। जॉर्डन की सरकार ने इन मामलों में शामिल अपराधों की गंभीरता को कारण बताया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश में अपराध दर को लेकर बहस जारी है। पिछली बार जॉर्डन में मौत की सज़ा 2014 में दी गई थी। इस घटना के बाद, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जॉर्डन सरकार पर मौत की सज़ा की नीति पर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ सकता है। यह निर्णय जॉर्डन की न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है।