बैंक ऑफ़ जापान (बीओजे) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य करने की प्रक्रिया एशिया के वित्तीय बाजारों पर यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की तुलना में अधिक प्रभाव डाल सकती है। ईसीबी की ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च रखने की नीति के मुकाबले, जापान की नीति में बदलाव का असर अधिक महसूस किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया, जापान की अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली से अधिक निकटता से जुड़ा हुआ है। इस कारण से, जापान द्वारा ब्याज दरों में किसी भी तरह के बदलाव का असर एशियाई मुद्राओं, बॉन्ड बाजारों और शेयर बाजारों पर जल्दी और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। यह बदलाव एशियाई देशों के निर्यात और निवेश पर भी असर डाल सकता है। हालांकि, यूरोप भी इस बदलाव से प्रभावित होगा, लेकिन प्रभाव एशिया की तुलना में कम होने की संभावना है। यह स्थिति वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है।