जापान में 1996 के बाद पहली बार 10-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड 3% तक पहुँच गई है। इससे सरकार की उधार लेने की लागत में वृद्धि हुई है, क्योंकि सार्वजनिक ऋण का बोझ बढ़ रहा है। तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति की आशंकाएं बढ़ रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप बांड की बिक्री में तेजी आई है। इस स्थिति के कारण शेयर बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई है। जापानी अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि सरकार को ऋण का प्रबंधन करने में अधिक कठिनाई होगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रवृत्ति जारी रहने पर आगे और चुनौतियाँ आ सकती हैं। यह घटना वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भी चिंता पैदा करती है।