फिल्मकार ताकाशी निशिहारा की नवीनतम फिल्म "नाउ एंड देन" जापान में विदेशियों के साथ भेदभाव के इतिहास और वर्तमान में शरणार्थियों के साथ हो रहे व्यवहार के बीच एक संबंध स्थापित करती है। यह फिल्म एक ऐतिहासिक अत्याचार को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ती है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या अतीत की गलतियों से कोई सबक लिया गया है। निशिहारा का यह कार्य जापान में नस्लीय भेदभाव की गहरी जड़ों को उजागर करता है। फिल्म शरणार्थियों की दुर्दशा और उन्हें मिलने वाले अन्यायपूर्ण व्यवहार पर प्रकाश डालती है। "नाउ एंड देन" दर्शकों को जापान के इतिहास और समाज में मौजूद पूर्वाग्रहों पर सोचने के लिए मजबूर करती है। यह फिल्म इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने और संवाद को प्रोत्साहित करने का प्रयास करती है।

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