जापान और अमेरिका के संयुक्त हस्तक्षेप से येन को कुछ समय के लिए राहत मिली थी, जिसके बाद येन का मूल्य 5% तक बढ़ा। हालांकि, यह वृद्धि अस्थायी साबित हुई, और अब इसका आधा हिस्सा वापस खो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हस्तक्षेप केवल एक अल्पकालिक समाधान है। यदि जापान अपनी ब्याज दरें बढ़ाता है, तो यह अमेरिका के लिए प्रतिकूल साबित हो सकता है। येन की अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस स्थिति से आगे की नीति निर्धारण में चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। बाजार की प्रतिक्रिया दर्शाती है कि केवल हस्तक्षेप से दीर्घकालिक स्थिरता प्राप्त करना मुश्किल है।