जापान धीरे-धीरे विश्व को वित्तपोषित करना बंद कर रहा है, जिससे वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले 25 वर्षों से, जापान ने कम या नकारात्मक ब्याज दरों के कारण अमेरिकी, यूरोपीय और ऑस्ट्रेलियाई बॉन्ड में भारी निवेश किया है। इस निवेश ने जापान को अमेरिकी सरकारी ऋण का सबसे बड़ा विदेशी धारक बना दिया है। अब, जापान धीरे-धीरे यह वित्तपोषण कम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अगले वैश्विक संकट की शुरुआत हो सकती है। यह दुनिया भर के बाजारों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है और वित्तीय अस्थिरता को बढ़ा सकता है। इस बदलाव का कारण जापान की बदलती आर्थिक परिस्थितियां और घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना है।