जापान में, 1966 में एक लूट-हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए हीरोमु साकाहारा को मरणोपरांत रिहा करने की तैयारी की जा रही है। साकाहारा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन हाल के पुनर्परीक्षण में सबूतों की कमी पाई गई है। शिगा प्रान्त के हिनो शहर में एक शराब की दुकान की मालकिन की हत्या और तिजोरी चोरी के आरोप में उन्हें दोषी ठहराया गया था। साकाहारा की 2011 में मृत्यु हो गई थी, लेकिन उनके परिवार ने लगातार पुनर्विचार याचिका दायर की। नए सबूतों के आधार पर, अदालत ने माना है कि मामला संदिग्ध है और रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला जापान की न्याय प्रणाली में एक दुर्लभ घटना है, जहां किसी मृत व्यक्ति को मरणोपरांत निर्दोष माना जा रहा है। यह निर्णय दशकों पुराने मामले में न्याय की तलाश को दर्शाता है।