सामाजिक मंत्रालय कृत्रिम गर्भाधान संबंधी कानूनों में संशोधन करने की योजना बना रहा है। इस संशोधन का मुख्य बिंदु सरकार द्वारा वित्त पोषित उपचारों के लिए आयु सीमा को बढ़ाना है। वर्तमान नियमों के तहत, कुछ आयु वर्ग की महिलाओं को ही सरकारी सहायता से आईवीएफ़ उपचार मिल पाता है। मंत्रालय का यह कदम उन महिलाओं को भी इस उपचार का लाभ देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है जो वर्तमान आयु सीमा से बाहर हैं। इस प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है और जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बांझपन से जूझ रहे अधिक जोड़ों को माता-पिता बनने का अवसर मिलेगा। इस बदलाव से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी मूल्यांकन किया जा रहा है।