पिएत्रेंजेलो बुट्टाफूको के प्रति गहरी प्रशंसा व्यक्त करते हुए, लेखक इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि कैसे बुट्टाफूको एक बुद्धिमान और परिष्कृत व्यक्ति हैं, जिन्हें "बुद्धिजीवी" कहलाना पसंद नहीं है। लेख में बिएनाले और कला जगत पर किए गए एक अनावश्यक अपमान की बात कही गई है, जो लेखक को परेशान करता है। यह घटना कला, कलाकारों और संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना पर सवाल उठाती है। लेखक का मानना है कि यह अपमान न केवल बिएनाले के लिए बल्कि हम सभी के लिए एक ठेस है। यह घटना सांस्कृतिक संवाद और आलोचना के तरीकों पर विचार करने के लिए एक अवसर प्रदान करती है। कुल मिलाकर, यह पाठ एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक घटना पर एक व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है, जो कला और सम्मान के मूल्यों को उजागर करती है।