अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को इजरायली दक्षिणपंथी दलों ने रणनीतिक हार के रूप में देखा है। उनका मानना है कि इस समझौते के परिणामस्वरूप इजरायल को लेबनान से अपनी सेना हटानी पड़ सकती है या फिर अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी पड़ सकती है। यह समझौता इजरायल की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा कर सकता है, ऐसा उनका मत है। दक्षिणपंथी नेताओं ने इस समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए इसे इजरायल के हितों के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि इस समझौते से ईरान की शक्ति और प्रभाव क्षेत्र में वृद्धि होगी। इस स्थिति को लेकर इजरायली सरकार में भी चिंता व्यक्त की जा रही है। फिलहाल, इजरायल सरकार इस समझौते के प्रभावों का आकलन कर रही है और आगे की रणनीति तय करने में जुटी है।