इज़राइल सरकार पर आरोप है कि वह फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ हिंसा करने वाले चरमपंथी बसने वालों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कदम को इन बसने वालों की हिंसक गतिविधियों को कम करने के एक प्रयास के रूप में पेश किया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह नीति वास्तव में हिंसा को बढ़ावा दे सकती है और क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकती है। इस फंडिंग का उद्देश्य चरमपंथियों को नियंत्रित करना बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है। इज़राइल सरकार ने अभी तक इस आरोप पर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इससे फ़लस्तीनी क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। इस फंडिंग की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
