मिस्र की दार अल-इफ्ता की फतवा समिति से एक प्रश्न पूछा गया था कि क्या मृत व्यक्ति जीवितों द्वारा दिए गए अभिवादन को सुन पाते हैं और उसका जवाब दे पाते हैं। इस प्रश्न का उद्देश्य मृतकों की चेतना और जीवितों के साथ उनके संभावित संबंध को समझना था। समिति ने इस विषय पर इस्लामी सिद्धांतों और विद्वानों की राय के आधार पर विस्तृत जवाब दिया। हालांकि, सटीक उत्तर प्रश्न की जटिलता और धार्मिक व्याख्याओं पर निर्भर करता है। यह प्रश्न अक्सर शोक संतप्त परिवारों के मन में उठता है जो अपने प्रियजनों के साथ संवाद स्थापित करने की उम्मीद करते हैं। इस मामले में, इस्लामी शिक्षाएं धैर्य रखने और मृतकों के लिए प्रार्थना करने पर जोर देती हैं।
