इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, तसुआ और आशूरा दोनों ही महत्वपूर्ण व्रत हैं, लेकिन दोनों के बीच अंतर है। तसुआ, आशूरा से पहले का दिन है और इसे हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) द्वारा किया गया माना जाता है, जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के उपवास की याद में था। आशूरा, इस्लामी कैलेंडर का दसवां दिन है और यह हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) की शहादत की याद में मनाया जाता है। कुछ विद्वानों का मानना है कि आशूरा का व्रत अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हज़रत इमाम हुसैन की कुर्बानी से जुड़ा है। वहीं, कुछ का मानना है कि तसुआ और आशूरा दोनों का व्रत करना बेहतर है। इन दोनों व्रतों का अपना-अपना महत्व है और मुस्लिम समुदाय में इन्हें श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।