हॉलीवुड में कलात्मक जोखिम लेने वाली फिल्मों का दौर खत्म होने को है, क्योंकि अब कलात्मक जोखिम आर्थिक जोखिम से जुड़ा हुआ है। ऐसी फ़िल्मों जैसे “डिगर” को अब विलासिता माना जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि फिल्म उद्योग में वित्तीय जोखिमों से बचने का प्रयास किया जा रहा है। निर्माता अब ऐसे प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो सुरक्षित और लाभदायक हों। इसका मतलब है कि नए और साहसिक विचारों को कम मौका मिलेगा। यह बदलाव फिल्म उद्योग को प्रभावित करेगा और दर्शकों को कम रचनात्मक फिल्में देखने को मिल सकती हैं। इससे कलात्मक स्वतंत्रता और विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।