सिप्टू (Siptu) के 75,000 सदस्यों ने सार्वजनिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हड़ताल के पक्ष में मतदान किया है। ये सदस्य स्वास्थ्य, स्थानीय शासन और राज्य एजेंसियों में कार्यरत हैं। यह मतदान वेतन संबंधी विवाद को और बढ़ा रहा है, जो लंबे समय से चल रहा है। सिप्टू का कहना है कि सदस्यों को उचित वेतन वृद्धि नहीं मिल रही है, जिससे उनके जीवन स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। हड़ताल की तारीख अभी तय नहीं की गई है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी। सरकार और सिप्टू के बीच इस मुद्दे पर बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है। इस हड़ताल से सार्वजनिक सेवाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।