ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़लिबाफ़ ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच किसी भी संभावित समझदारी के लिए बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं पर ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते को प्रभावी बनाने के लिए ठोस गारंटी की आवश्यकता है। ग़लिबाफ़ ने इस बात पर बल दिया कि केवल मौखिक सहमति पर्याप्त नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है, और दोनों देश अप्रत्यक्ष रूप से वार्ता में लगे हुए हैं। ग़लिबाफ़ की टिप्पणी का उद्देश्य किसी भी भविष्य के समझौते की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि बिना ठोस प्रतिबद्धताओं के, समझदारी टिकाऊ नहीं होगी। यह बयान ईरान की विदेश नीति में दृढ़ता और सावधानी को दर्शाता है।