ईरान गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है और उसकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की तेल बिक्री में भारी गिरावट आई है, जिससे राजस्व कम हो गया है। पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की नीति अपनाई थी, जिसका उद्देश्य उसे एक नए समझौते पर वापस लाना था। अब सवाल यह है कि क्या ट्रम्प का यह 'आर्थिक डी-डे' ईरान को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर पाएगा। ईरान की सरकार संकट से निपटने के लिए संघर्ष कर रही है और मुद्रास्फीति बढ़ रही है। यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो यह ईरान के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। इस स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।