विश्लेषकों का मानना है कि दशकों से ईरान अपनी घरेलू दमनकारी नीतियों से ध्यान भटकाने के लिए अमेरिका को अपना ‘मुख्य शत्रु’ बताकर पेश करता रहा है। हालिया ट्रंप प्रशासन के साथ हुई अस्थायी शांति समझौते के बावजूद, यह स्थिति पूरी तरह से बदलने की संभावना कम है। ईरान की सरकार अभी भी अमेरिका को शत्रु के रूप में चित्रित करने की रणनीति अपना सकती है, भले ही समझौते से तनाव कम हुआ हो। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के भीतर की राजनीतिक मजबूरियां और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं अमेरिका के साथ पूर्ण सामान्यीकरण में बाधा बन सकती हैं। इस समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है, लेकिन यह ईरान की विदेश नीति या विचारधारा में बदलाव की गारंटी नहीं देता। इसलिए, अमेरिका और ईरान के बीच शत्रुतापूर्ण संबंधों का जोखिम बना रहेगा। यह समझौता ईरान को अपनी घरेलू छवि मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत की स्थिति में लाभ उठाने का अवसर दे सकता है।