ईरान में कट्टरपंथी गुट अमेरिकी समझौते को लेकर देश के नेतृत्व पर खुलकर बरस रहे हैं। वे इस समझौते को देश के हितों के खिलाफ मानते हैं और इसे ‘समझौता’ कहकर शीर्ष अधिकारियों की आलोचना कर रहे हैं। कट्टरपंथियों का मानना है कि यह समझौता ईरान की शक्ति और प्रभाव को कम करेगा। उन्होंने प्रदर्शनों और भड़काऊ नारों के माध्यम से अपनी असहमति व्यक्त की है, जिसमें “समझौता करने वाले को मौत” जैसे नारे शामिल हैं। यह घटना ईरान के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है, जहाँ अब शीर्ष नेताओं को आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति भविष्य में ईरान की विदेश नीति और आंतरिक स्थिरता के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकती है। इस असंतोष से सरकार पर समझौते को लेकर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ सकता है।