फरवरी में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य ईरान की जनता को सरकार के खिलाफ भड़काना या फिर सरकार को अमेरिकी मांगों को मानने के लिए मजबूर करना था। हालांकि, यह रणनीति विफल रही, क्योंकि ईरानी जनता ने सरकार का समर्थन जारी रखा। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों में ट्रम्प प्रशासन द्वारा किए गए व्यापक छंटनी का भी इस विफलता में योगदान रहा। शुरुआती आकलन के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी हमलों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया और जनता का समर्थन जुटाने में सफल रहा। वर्तमान स्थिति में, यह स्पष्ट नहीं है कि इस संघर्ष का अंतिम परिणाम क्या होगा, लेकिन अमेरिका की प्रारंभिक योजनाएं विफल हो गई हैं। यह संघर्ष क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है।