ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेज़ा अरेफ़ ने शनिवार को कहा कि देश युद्धोत्तर काल में क्षेत्रीय देशों और इस्लामी राष्ट्रों के साथ सहयोग के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने इस नए दौर को महत्वपूर्ण बताते हुए आपसी संबंधों को और मज़बूत करने पर ज़ोर दिया। यह बयान तेहरान में दिया गया और ईरान की विदेश नीति में एक बदलाव का संकेत देता है। अरेफ़ ने विशेष रूप से क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। माना जा रहा है कि यह पहल ईरान के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बेहतर बनाने और क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगी। यह कथन ईरान द्वारा अपनी कूटनीति को आगे बढ़ाने और अन्य मुस्लिम देशों के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करने की इच्छा को दर्शाता है। इस नए दृष्टिकोण से मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।