अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के तहत ईरान को 5,360 खरब रुपिया (इंडोनेशियाई मुद्रा) प्राप्त होंगे। हालांकि, इस धनराशि के भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। वेंस ने स्पष्ट किया है कि यह राशि अमेरिकी करदाताओं के पैसे से नहीं दी जाएगी। समझौते की शर्तों के अनुसार, ईरान को यह धनराशि किस स्रोत से प्राप्त होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इस मुद्दे पर अमेरिका में बहस छिड़ गई है, क्योंकि कुछ लोगों का मानना है कि ईरान को वित्तीय सहायता प्रदान करना उचित नहीं है। इस समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है। भुगतान के स्रोत की जानकारी जल्द ही सार्वजनिक होने की उम्मीद है।