अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है, और एक अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दो महीने का समय दिया गया है। अमेरिकी विशेषज्ञ जान हेलनबर्ग का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए सबसे बड़ा खतरा यह समझौता ही है। उनके अनुसार, यह समझौता ट्रंप के लिए तत्काल चुनौती प्रस्तुत करता है। बातचीत की सफलता अनिश्चित है, और समझौते की शर्तों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। यदि समझौता होता है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए इसे रद्द करना या बदलना मुश्किल हो सकता है। यह स्थिति अमेरिका की विदेश नीति और मध्य पूर्व में उसकी भूमिका के लिए जटिलताएं पैदा कर सकती है। फिलहाल, सभी निगाहें आगामी महीनों में होने वाली वार्ताओं पर टिकी हैं।