ईरान में अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर गुटीय मतभेद जारी हैं। देश के नेता इस समझौते के कार्यान्वयन पर बहस कर रहे हैं, वहीं पराजय की आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। कट्टरपंथी गुट समझौते को देश की संप्रभुता के लिए खतरा मानते हैं, जबकि उदारवादी गुट इसे आर्थिक सुधार और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बेहतर बनाने का अवसर मानते हैं। यह विभाजन ईरान की घरेलू राजनीति में गहरा प्रभाव डाल रहा है और सरकार के लिए समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करना मुश्किल बना रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह मतभेद ईरान की विदेश नीति को अस्थिर कर सकता है। फिलहाल, समझौते के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस मुद्दे पर ईरान के भीतर गहन विचार-विमर्श चल रहा है।