ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते पर तेहरान में तीव्र प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। शासन के भीतर कट्टरपंथी गुट, जिन्हें “चिंतित” कहा जा रहा है, इस समझौते का विरोध कर रहे हैं और वाशिंगटन से बदला लेने का आह्वान कर रहे हैं, तथा सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, रेवोल्यूशनरी गार्ड्स इस समझौते का समर्थन कर रहे हैं। सत्ता प्रतिष्ठान इस समझौते को एक रणनीतिक जीत के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहा है। कट्टरपंथियों का मानना है कि यह समझौता ईरान के हितों के खिलाफ है। दूसरी ओर, सरकार इसे देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए फायदेमंद बता रही है। इस विभाजन के बावजूद, सत्ता के प्रमुख केंद्र समझौते के पक्ष में एकजुट दिखाई दे रहे हैं। यह समझौता ईरान की घरेलू राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।