अमेरिका और ईरान के बीच हो रहे समझौते ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को राजनीतिक रूप से बेहद मुश्किल स्थिति में ला खड़ा किया है। दशकों से नेतन्याहू ने अमेरिका की नीतियों को प्रभावित करने, ईरान का विरोध करने और इजराइल की सुरक्षा की गारंटी देने की छवि बनाई थी, लेकिन यह समझौता इन तीनों पहलुओं पर सवाल खड़े करता है। इस समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय सहयोगियों को समर्थन और परमाणु गतिविधियों जैसे इजराइल के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित नहीं किया गया है। इससे ईरान को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता नेतन्याहू की ईरान के खिलाफ रणनीति की विफलता को दर्शाता है। इसके साथ ही, नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच संबंध भी तनावपूर्ण हो गए हैं, जिससे नेतन्याहू की वाशिंगटन में प्रभावशीलता कम हो गई है। यह समझौता नेतन्याहू के राजनीतिक करियर और ईरान पर उनकी रणनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
