ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी समझौते के बाद मध्य पूर्व खाड़ी क्षेत्र में फंसे 85 मिलियन बैरल से अधिक तेल की आपूर्ति वैश्विक बाजारों में आने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते से तेल की आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। यह तेल हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भेजा जाएगा, जिससे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में आवाजाही सुचारू होगी। फिलहाल यह समझौता सीमित अवधि के लिए है, लेकिन तेल बाजार पर इसका तत्काल प्रभाव दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आ सकती है। हालांकि, दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि यह समझौता आगे बढ़ता है या नहीं। इस समझौते के परिणामस्वरूप तेल उत्पादक देशों की नीतियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।