सूचीबद्ध कंपनियों में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की प्रक्रियाओं को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। दरअसल, शेयर बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटने से पहले ही कंपनी के प्रमोटर और अंदरूनी लोग अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। इस कदम से निवेशकों को आशंका है कि प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बेचकर लाभ कमाना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक कानूनी खामी का फायदा उठाने जैसा है, जहां इस्तीफे के बाद शेयर बिक्री पर प्रतिबंध लागू नहीं होता। इस प्रवृत्ति से बाजार में पारदर्शिता और निवेशकों के हितों पर सवाल उठ रहे हैं। नियामक प्राधिकरण इस मामले की जांच कर सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियमों का दुरुपयोग न हो और निवेशकों का विश्वास बना रहे। यह घटनाक्रम आईपीओ लाने वाली कंपनियों के लिए एक चेतावनी के रूप में भी काम कर सकता है।